राठी ने जोर देकर कहा कि एक भारतीय नागरिक के तौर पर उन्हें भी विरोध प्रदर्शन का पूरा अधिकार है, ठीक वैसे ही जैसे देश के अन्य नागरिकों को है।
राठी ने एक वीडियो जारी कर बताया कि 20 लोग, जो सादी वर्दी में थे, उनकी माँ को धक्का-मुक्की करते हुए उनके बेडरूम में घुस आए और उन्हें नींद से उठाकर ले गए। उन्होंने इस घटना को 'किडनैपिंग' करार दिया, न कि गिरफ्तारी या हिरासत, क्योंकि पुलिस ने न तो अपनी पहचान बताई और न ही किसी कानून की धारा का उल्लेख किया। राठी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास भारतीय पासपोर्ट है और वे भारतीय नागरिक हैं, किसी विदेशी पासपोर्ट होने की अफवाहों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके घर में केवल वे, उनके पिता और माँ मौजूद थे। उन्होंने बताया कि उन्हें घर से घसीटकर जीप में बिठाया गया और इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं। राठी ने कहा कि उनके घर से निकलते ही उनका फोन और उनके परिवार के सदस्यों के फोन भी जब्त कर लिए गए थे। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ बताया और कहा कि अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है तो यह किसी के भी साथ हो सकता है। राठी ने यह भी बताया कि वर्तमान में उनके आसपास 15 लोग मौजूद हैं, जिन्हें वे 'हाउस अरेस्ट' कह रहे हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। राठी ने कहा कि वे इस मामले में आगे की जानकारी देंगे और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक सामान्य नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध करने का अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। यह घटना दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई, हालांकि राठी ने स्पष्ट किया कि वे स्वयं उस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे।






