मध्य प्रदेश के पटवारी स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि की रजिस्ट्री का काम एक बार फिर नहीं करेंगे। पटवारी संघ ने यह निर्णय कलेक्टरों द्वारा निलंबित और बर्खास्त किए गए 4 हजार से अधिक पटवारियों की बहाली के आदेश जारी न करने के कारण लिया है। संघ का कहना है कि जब तक इन आदेशों का पालन नहीं होता, तब तक वे रजिस्ट्रियां नहीं करेंगे। यह फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ हुई बैठक के बाद सरकार और पटवारी संघ के बीच बनी सहमति के ठीक विपरीत है। मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने रविवार शाम एक वीडियो जारी कर अपने रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 218 के तहत एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में यह प्रावधान था कि स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन मामलों में पटवारियों पर कोई केस नहीं चलाया जाएगा। यह घोषणा पटवारियों के लिए एक बड़ी राहत थी, क्योंकि उन्हें इस योजना में अपनी भूमिका को लेकर कानूनी जोखिमों की चिंता थी। हालांकि, पटवारी संघ का आरोप है कि सरकार के आदेश के बावजूद, प्रदेश के कलेक्टरों ने अब तक निलंबित और बर्खास्त किए गए पटवारियों की बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इस स्थिति को देखते हुए, पटवारी संघ ने फिलहाल स्वामित्व योजना के तहत काम से अलग रहने का निर्णय लिया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक उनके साथियों की बहाली नहीं हो जाती, तब तक वे इस योजना में योगदान नहीं देंगे। इससे पहले, 9 अक्टूबर को काम करने की सहमति बनी थी। दरअसल, 9 अक्टूबर की शाम को ही सरकार और पटवारी संघ के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति हो गई थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद, संघ ने 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने की घोषणा की थी। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष बघेल ने तब यह भी कहा था कि योजना में काम करने वाले पटवारियों को न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी किए जाएंगे। सहमति के अनुसार, 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों को शून्य घोषित करने पर भी विचार किया गया था। इसके अतिरिक्त, वेतन विसंगति के मामले में एक आयोग के गठन के बाद आगे की कार्रवाई पर सहमति बनी थी। मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले एक बड़े महासम्मेलन में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया था। यह आश्वासन पटवारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रयासरत थे। स्वामित्व योजना क्या है, यह समझना भी महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत, गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वेक्षण किया जाता है। इसके बाद, वहां रहने वाले लोगों के संपत्ति संबंधी अधिकारों का एक विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। सरकार अब ऐसे लोगों को उनके घरों और जमीनों की मुफ्त रजिस्ट्री प्रदान कर रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व को स्पष्ट करना और लोगों को उनके मालिकाना हक का कानूनी प्रमाण देना है। योजना के तहत, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक मध्य प्रदेश में करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री की जानी थी। एक खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में हितग्राहियों से कोई स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। सरकार ने इस खर्च का वहन खुद करने का फैसला किया है, जिससे ग्रामीण आबादी पर आर्थिक बोझ कम हो। प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। यह आंकड़ा योजना की प्रगति को दर्शाता है, लेकिन पटवारियों के काम पर लौटने में हो रही देरी इस प्रगति को बाधित कर रही है। पटवारियों की मुख्य आपत्ति स्वामित्व योजना में उनकी भूमिका से जुड़ी है। योजना में, ग्रामीण को ‘क्रेता’ और पटवारी को ‘विक्रेता/निष्पादक’ की भूमिका सौंपी गई है। इसका अर्थ यह है कि किसी संपत्ति के सरकारी जमीन से हस्तांतरण के दस्तावेज पर पटवारी के हस्ताक्षर से यह दर्ज होता है कि वह सरकारी जमीन का हस्तांतरण कर रहा है। पटवारियों की चिंता यह है कि भविष्य में यदि जमीन की सीमा, हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो ‘निष्पादक’ के तौर पर उनकी कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकती है। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक का फैसला करने या रिकॉर्ड में बदलाव करने का अधिकार उनके पास नहीं है। 24 हजार पटवारी हड़ताल पर हैं, जिससे यह महत्वपूर्ण योजना प्रभावित हो रही है।
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स्वामित्व योजना का काम नहीं करेंगे पटवारी, बहाली के आदेश जारी न होने से अड़े
14 अक्टूबर 2026 को 5:58 pm बजे

स्वामित्व योजना का काम नहीं करेंगे पटवारी, बहाली के आदेश जारी न होने से अड़े
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