एम्स भोपाल को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से फुल एक्रिडिएशन मिला है, जो अस्पताल की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने का प्रमाण है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के पहले चरण में स्थापित देश के छह एम्स में यह उपलब्धि हासिल करने वाला भोपाल पहला संस्थान बन गया है। यह मान्यता अस्पताल की उपचार व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मरीजों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 1,457 बिस्तरों वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले एम्स भोपाल को मिला यह पूर्ण प्रत्यायन 2030 तक मान्य रहेगा। इस मान्यता के दायरे में संस्थान की सभी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और विशिष्ट उपचार व्यवस्थाओं के कुल 1,457 बिस्तर शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए अस्पताल की सुविधाओं, उपचार प्रक्रियाओं, गुणवत्ता प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं का निर्धारित राष्ट्रीय मानकों के अनुसार गहन मूल्यांकन किया गया। आम मरीजों के लिए यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्यायन की प्रक्रिया में अस्पताल की समग्र व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की गहन और व्यवस्थित जांच की जाती है। यह जांच उपचार व्यवस्था को और बेहतर बनाने, मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एम्स भोपाल ने जुलाई 2025 में एनएबीएच के साथ पंजीकरण कराया था। इसके बाद, पांच वरिष्ठ और अनुभवी मूल्यांकनकर्ताओं की एक विशेष टीम ने संस्थान का विस्तृत भौतिक निरीक्षण किया। इस दौरान, अस्पताल के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित सभी इंतजामों की गहन समीक्षा की गई। मूल्यांकनकर्ताओं ने विभिन्न विभागों के स्वास्थ्यकर्मियों से सीधे बातचीत की और अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। निर्धारित मानकों और तय मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर अंक दिए गए। निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्टों को स्वीकार किए जाने पर ही एम्स भोपाल को यह प्रतिष्ठित पूर्ण प्रत्यायन प्रदान किया गया।
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एम्स भोपाल को मिला एनएबीएच से फुल एक्रिडिएशन, 2030 तक रहेगी मान्यता
14 अक्टूबर 2026 को 5:58 pm बजे

एम्स भोपाल को मिला एनएबीएच से फुल एक्रिडिएशन, 2030 तक रहेगी मान्यता
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